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Showing posts with the label Spiritual Lessons

भजन-सिमरन (Praise to God)

एक शख्स  सुबह सवेरे उठा। उसने साफ़ कपडे पहने और सत्संग घर की तरफ निकल गया तांकि सतसंग का आनंद प्राप्त कर सके।                          चलते चलते रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा, कपडे कीचड में सन गए। वो वापिस घर आया, कपडे बदल कर वापस सत्संग की तरफ रवाना हुआ। फिर ठीक उसी जगह ठोकर खाकर गिर पड़ा और वापिस घर आकर कपडे बदले। फिर सत्संग की तरफ रवाना हो गया। जब तीसरी वार उस जगह पर पोहंचा तो क्या देखता है कि एक शख्स चिराग हाथ में लिए खड़ा है और उसे अपने पीछे चलने के लिए कह रहा है।                         इस तरह वह शख्स उसे सत्संग घर के दरवाजे तक ले आया। पहले वाले शख्स ने उससे कहा कि आप भी अंदर आकर सत्संग सुन लें। लेकिन वह शख्स चिराग हाथ में थामे खड़ा रहा और सत्संग घर में दाखिल नहीं हुआ। दो तीन वार इंकार करने पर उसने पुछा आप अंदर क्यों नहीं आ रहे है?                        ...

अरदास (Pray)

रात के 2 का समय था। एक आदमी को नींद नहीं आ रही थी। उसने चाय पी, टीवी देखा, इधर उधर घूमने लगा पर फिर भी उसे नींद नहीं आई।                          आखिर थक के उसने नीचे आकर अपनी गाडी निकाली और शहर की तरफ निकल गया। उसने रस्ते में एक गुरद्वारा साहिब देखा और सोचने लगा कि क्यों ना यहाँ थोड़ी देर रुक के भगवान् को अरदास करूं, शायद मन को शान्ति मिल जाये। वो जब अंदर गया तो उसने देखा कि एक आदमी वहां पहले से ही बैठा हुआ था जो बहुत उदास दिख रहा था और उसकी आखों में पानी भी था।                          उसने उस उदास आदमी को पुछा, तुम यहाँ इतनी रात को क्या कर रहे हो?                          उदास आदमी बोला, मेरी पतनी हस्पताल में है। सुबह उसका ऑपरेशन है और अगर ऑपरेशन नहीं हुआ तो वो मर जाएगी। मेरे पास ऑपरेशन के लिए पैसे भी नहीं है।           ...

परमात्मा से मिलाप ( Union with the Divine )

एक आठ साल का छोटा सा बच्चा अक्सर परमात्मा से मिलने की जिद किया करता था। उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो परमात्मा के साथ खाये।                          एक दिन उसने 1 थैले में 5-6  रोटियां रखी और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा। चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया। संध्या का समय हो गया। उसने देखा नदी के तट पर एक बजुर्ग बूढ़ा बैठा है। ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इंतज़ार में वहां बैठा उसका रास्ता देख रहा हो।                         वो आठ साल का मासूम बालक, बजुर्ग बूढ़े के पास जा कर बैठ गया। अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया और उसने अपना रोटी वाला हाथ बूढ़े की और बढ़ाया और मुस्करा के देखने लगा, बूढ़े ने रोटी ले ली। बूढ़े के झारूरियों वाले चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी आ गयी। आँखों में ख़ुशी के आँसू भी थे। बच्चा बूढ़े को देखे जा रहा था। जब बूढ़े ने रोटी खा ली तो बच्चे ने एक और रोटी बूढ़े को दी।                ...

दंड ( A Little Boy, Punishment )

अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, जो स्टोर में चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकडे जाने पर गार्ड की गिरफत से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया। जज ने जुर्म सुना और लड़के से पुछा,"तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था, ब्रेड और पनीर का पैकेट"? लड़के ने नीचे नज़रे कर के जवाब दिया, हां। जज ने पुछा, क्यों? लड़का ने कहा, मुझे जरुरत थी। जज- खरीद लेते। लड़का- पैसे नहीं थे। जज- घर वालो से ले लेते? लड़का- घर में सिर्फ माँ है जो बीमार और बेरोजगार है, पनीर और ब्रेड भी माँ के लिए चुराई थी। जज- तुम कुछ काम नहीं करते? लड़का- करता था, एक कार वाश में। माँ की देखभाल के लिए इक छुट्टी ली थी, तो मुझे निकाल दिया गया। जज- तुम किसी से मदद मांग लेते। लड़का- सुबह से घर से निकला था, तक़रीबन 50 लोगों के पास गया, बिलकुल आखिर में यह कदम उठाया।                          जिरह ख़तम हुई, जज ने फैंसला सुनाना शुरू किया, 'चोरी और ख़ुसूसन ब्रेड की चोरी बोहत शर्मनाक जुरम है और इस जुर्म के हम सब जिम्मेदार है। अदालत में मौजूद हर शकस मेरे सहित मुजरिम है, इसीलि...

अच्छाई पलट - पलट कर आती रहती है - A True Story of Sir Randolph Fleming - Winston Churchill

                        ब्रिटैन के स्कॉटलैंड में फ्लेमिंग ( Fleming )नाम का एक गरीब किसान रहता था। एक दिन वह अपने खेत पर काम  कर रहा था। एक दिन वह अपने खेत पर काम कर रहा था। अचानक पास में से किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी। किसान  अपना साजो सामान व औजार फेंका और तेजी से आवाज की तरफ भागा।                          आवाज की दिशा में जाने पर उसने देखा कि एक बच्चा दलदल में डूब रहा था। वह बालक कमर तक कीचड़ में फंसा हुआ बहार निकलने के लिए संगर्ष कर रहा था। वह डर  मारे बुरी तरह कांप रहा था और चिल्ला रहा था।                          किसान ने आस पास में लंबी टहनी ढूंढी। अपनी जान पर खेलकर उस टहनी के सहारे बच्चे को बाहर निकाला। अगले दिन उस किसान की छोटी सी झोपडी के सामने एक शानदार  गाड़ी आकर खड़ी हुई। उसमें से कीमती वस्त्र पहने हुए एक सज्जन उतरे।    ...

निर्भर (Dependent)

                         एक बार गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गयी। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबें पाँव बढ़ रहा है।                          वह डर के मारे इधर उधर भागने लगी। वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई।                         वह बाघ भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर घुस गया। तब उन्होने देखा कि वह तालाब बहुत गहरा नहीं था। उसमे पानी कम् था और वह कीचड से भरा हुआ था। उन दोनों के बीच की दूरी काफी कम् थी। लेकिन अब वह कुछ नहीं कर पा रहे थे। वह गाय उस कीचड के अंदर धीरे-धीरे धसने लगी। वह बाघ भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका। वह भी धीरे-धीरे कीचड के अंदर धंसने लगा। दोनों ही करीब करीब गले तक उस कीचड के अंदर फंस गए।          ...

कर्मो की दौलत (Wealth of Deeds)

                         एक राजा था , जिसने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकठ्ठा करके (एक तरह का शाही खजाना) आबादी से बाहर जंगल में एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने में सारे खजाने को खुफ़िआ तोर पर छुपा दिया था। खजाने की सिर्फ दो चाबियां थी। एक चाबी राजा के पास और एक उसके ख़ास मंत्री के पास थी।  इन दोनों के आलावा किसी को भी उस खुफ़िआ खजाने का राज मालूम ना था। एक रोज किसी को बताये वगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकला, तहखाने का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गया और अपने खजाने को देख देख कर खुश हो रहा था, और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था।                                                  उसी वक़्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा कि खजाने का दरवाजा खुला है। वो हैरान हो गया और ख्याल किया कि कहीं कल रात जब मै ख़जाना देखने आया तब शायद खजाना का दरवाजा खुला रह गय...

सतगुरु का हुक्म (Satguru's Order)

                                   एक रेलवे लाइन के पास काँटा ठीक करने वाला नौकर था। उसके दो बच्चे रेलवे लाइन पर खेल रहे थे। उधर से गाडी का सिगनल हो गया। अब अगर वह दौड़ कर बच्चो को बचाता है तो उसे पोहचने में देर हो जाती और अगर वो काँटा बदल देता तो गाडी गिर जाती और हज़ारो लोग मर जाते।                                    उसने जोर से बच्चो को हुकम दिआ, लेट जाओ। उनमे से इक बच्चा फौरन लेट गया, दूसरा कहने लगा, क्यों लेटूँ? इतने में गाडी आ गयी। जो लेटा था वो बच गया और जो कहता था "क्यों?" वह कट गया। जिसने बाप का हुकम माना वो बच गया।                                    इसी तरह सतगुरु का हुकम ऐबो-पापों से बचाता है। अगर पूछे,'ये बात मुझे क्यों कही', तो यहाँ क्यों कहने की गुजाइंश नहीं रह...

नामदान ( Nama Daan, Truth and way of God )

                                   महाराज जी से एक इस्त्री कहती है, आप ने जो नामदान मुझे बक्शा है, वो वापिस ले लीजिये।  महाराज जी बोले क्यों?                                     इस्त्री कहने लगी भजन पे बैठती हूँ मन लगता नहीं, भजन होता नहीं और अगर भजन पर नहीं बैठती तो बेचैनी होती है, मूड ख़राब हो जाता है। अब आप बताये मै नामदान वापिस ना करू तो क्या करू?  महाराज जी बोले                                     बेटी एक शर्त पे मै दिया हुआ नामदान वापिस ले सकता हूँ? इस्त्री बोली वो क्या शर्त है महाराज जी?                                 महाराज जी बोले, बेटी मै आटे में नमक डाल...

दया पर संदेह (Doubt on Guru's Mercy)

                         एक बार एक अमीर सेठ के यहाँ एक नौकर काम करता था। अमीर सेठ अपने नौकर से तो बोहत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह ईश्वर को अनाप शनाप कहता और कोसता था।                          एक दिन वह अमीर सेठ ककड़ी खा रहा था। सयोग से वह ककड़ी कच्ची और कड़वी थी। सेठ ने वह ककड़ी अपने नौकर को दे दी। नौकर ने उसे बड़े चाव से खाया जैसे वह बोहत स्वादिष्ट हो। अमीर सेठ ने पुछा- "ककड़ी तो बोहत कड़वी थी, भला तुम ऐसे कैसे खा गए?  नौकर बोला- आप मेरे मालिक हो. रोज ही स्वादिष्ट भोजन देते है। अगर एक दिन कुछ बेस्वाद या कड़वा भी दे दिया तो उसे सवीकार करने में भला क्या हर्ज़ है?                          अमीर सेठ अपनी भूल समझ गया। अगर ईश्वर ने इतनी सुख-सम्पदाय दी है और कभी कोई कटु अनुदान या सामान्य मुसीबत दे भी तो उसकी सद्भावना पर संदेह करना ठीक नहीं, वह नौकर और कोई नह...

हिफाज़त (Protection by GOD)

                         सूफी संत राबिया अक्सर इबादत करते करते सो जाया करती थी। एक दिन इसी तरह राबिया सो गई, तभी एक चोर आया और राबिया की चादर लेकर भागने लगा लेकिन उसे बाहर जाने का रास्ता दिखाई नहीं दिया। तीन चार बार दीवार से टकराने के बाद चादर एक जगह रखकर इत्मिनान से सोचना शुरू किया। तभी उसे रास्ता दिखाई दिया लेकिन जैसे ही चादर लेकर मुड़ा, फिर से अँधेरा छा गया। इस तरह उसने कई वार कोशिश की किन्तु हर वार जैसे ही वह चादर लेकर भागता, आखो के आगे अँधेरा छा जाता।                           आखिर वो नहीं माना तब गूँज के साथ एक आवाज आई, क्यों आफत मोल ले रहा है, सलामती चाहता है तो हिफाजत से चादर रख दे। इस चादरवाली ने खुद को खुदा के हवाले कर रखा है, इसीलिए शैतान भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता तो किसी और की क्या मज़ाल जो इसका कुश बिगाड़ सके! यह सुनते ही वह चोर चादर को हिफाज़त से रखकर भाग गया।                ...

विश्वाश (Faith)

 आठ साल का एक बच्चा 1 रूपये का सिक्का मुठी में लेकर एक दूकान पर जाकर बोला, -- क्या आपके दूकान में ईश्वर मिलेंगे? दुकानदार ने ये बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया।  बच्चा पास की दूकान में जाकर एक रुपये का सिक्का लेकर चुपचाप खड़ा रहा! -- ए लड़के, 1 रूपए में तुम क्या चाहते हो? -- मुझे ईश्वर चाहिए। आपके दूकान में हैं? दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया। लेकिन उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दूकान से दूसरी दूकान , दूसरी से तीसरी, ऐसे करते करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने क बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पोहंचा।  उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा, -- तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो? क्या करोगे ईश्वर लेकर? पहली वार इक दुकानदार के मुँह से ये बात सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणे लहराई। लगता है इसी दूकान पर ईश्वर मिलेंगे! बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया,  -- इस दुनिआ में माँ के इलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी माँ दिनंभर काम करके मेरे लिए खाना लाती है। मेरी माँ अब अस्पताल में हैं। अगर मेरी माँ मर गयी तो मुझे कौन खिलायेगा? डॉक्टर ने कहा है कि अब सिर्फ ईश्वर ही ...

अनजाने कर्म का फल ( Karam's Definition - True Work Definition )

एक राजा ब्राह्मणो को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था। राजा का रसोइया खुले आंगन में भोजन पक्का रहा था। उसी समय एक चील अपने पंजे में एक ज़िंदा साप को लेकर राजा के महल के ऊपर से गुजरी। तब पंजो में दबे साप ने अपनी आतम-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से जहर निकला। तब रसोइया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पक्का रहा था, उस लंगर में साप के मुख से निकली जहर की कुछ बुँदे खाने में गिर गई। किसी को कुछ पता नहीं चला। फल-सवरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे, उन् सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी। अब जब राजा को सारे ब्राह्मणो की मृत्यु का पता चला तो ब्राह्मण-हत्या होने से उसे बोहत दुःख हुआ। ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैंसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा? 1) राजा। .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है...  या  2) रसोइया। ..... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है.....  या  3) वह चील..... जो जहरीला साप लिए राजा के महल के ऊपर से गुजरी...  या  4) वह सांप। .... जिसने अपनी आतम रक्षा मे...

जैसा कर्म वैसा फल ( Guru's Lesson )

    एक आदमी ने जब एक बार सत्संग में यह सुना कि जिसने जैसे कर्म किये है, उसे अपने कर्मो अनुसार वैसे ही फल भी भोगने पड़ेंगे। यह सुनकर उसे बोहत आश्चर्य हुआ। अपनी आशंका का समाधान करने हेतु उसने सत्संग करने वाले संत जी से पूछा अगर कर्मो का फल भोगना ही पड़ेगा तो फिर सत्संग में आने का क्या फ़ायदा है?                                                              संत जी ने मुस्करा कर उसे देखा और इक ईट की तरफ इशारा करके कहा कि तुम इस ईट को छत्त पर ले जाकर मेरे सर पर फेंक दो यह सुनकर वह आदमी बोला इससे तो आपको चोट लगेगी दर्द होगा। मै यह नहीं कर सकता। संत ने कहा अच्छा, फिर उसे उसी ईट के भार के बराबर का रुई का गट्ठा बाँध कर दिया और कहा इसे ले जाकर मेरे सिर पे फेंकने से भी क्या मुझे चोट लगेगी??                                          ...